Bihar crime control : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपराध पर लगाम लगाने को लेकर शुरू से ही गंभीर रहे हैं। नवंबर, 2005 में सत्ता संभालते ही उन्होंने सबसे पहले बिहार में कानून का राज (Bihar crime control) स्थापित किया और अपराध पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई। 2005 से पहले बिहार में सत्ता संरक्षित अपराध खासकर ऑर्गेनाइज्ड क्राइम चरम पर था। अपहरण उद्योग का रूप ले लिया था, जिससे बिहार की छवि काफी खराब हुई थी लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट, बेहतर पुलिसिंग, जांच के आधुनिक संसाधनों और अन्य साधनों के जरिए अपराधियों पर लगाम कसा और उन्हें बिहार से बाहर जाने पर मजबूर किया।
Bihar crime control : अब अपराधियों की खैर नहीं
क्राइम पर कंट्रोल करने के कारण ही कालांतर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि ‘सुशासन बाबू’ की बनी। नए दौर में बेहतर पुलिसिंग और त्वरित, आधुनिक व वैज्ञानिक तरीके से अपराध की जांच के लिए नीतीश सरकार ने नई पहल की है। अब राज्य में चलंत फॉरेंसिक वाहनों के जरिए अपराध और अपराधियों पर नकेल कसा जाएगा।

बिहार में फॉरेंसिक चलंत वाहन अपराध की जांच (Bihar crime control) में एक नए युग की शुरुआत है। यह वाहन अपराध स्थल पर ही प्राथमिक जांच में पुलिस के लिए काफी मददगार साबित होगा। फॉरेंसिक चलंत वाहन अपराध के विश्लेषण की अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिससे जांच प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता आती है। फॉरेंसिक चलंत वाहन आधुनिक जांच उपकरणों से युक्त हैं।
इन वाहनों की मदद से घटनास्थल पर पहुंचकर तत्काल जांच शुरू (Bihar crime control) की जा सकेगी। इसके पहले कोई अपराध होने पर घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र कर जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था और जांच में विलंब होने के कारण अपराधी पुलिस की नजरों से बच जाते थे, वहीं पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलने में विलंब होता था, जिससे उनमें सरकार के खिलाफ असंतोष पनपता था। अब चलंत फॉरेंसिक वाहनों के जरिए मोबाइल टीम घटनास्थल पर ही जांच शुरू कर देगी जिससे अपराध की जांच (Bihar crime control) त्वरित गति से शुरू हो पाएगी और पुलिस को अनुसंधान में काफी सुविधा होगी।

फॉरेंसिक चलंत वाहन से पुलिस को अनुसंधान में काफी मदद मिलेगा। ये वाहन घटनास्थल पर तुरंत पहुंचकर साक्ष्य एकत्र करने और प्राथमिक जांच करने में मदद करते हैं जिससे जांच प्रक्रिया में तेजी आती है। साथ ही फॉरेंसिक चलंत वैन में अत्याधुनिक तकनीक और उपकरण होते हैं जो साक्ष्यों को सुरक्षित और संरक्षित तरीके से एकत्र और संग्रहीत करने में मदद करते हैं।
इन वाहनों में फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट, नारकोटिक्स, रक्त और अन्य जैविक साक्ष्यों को इकट्ठा (Bihar crime control) करने के लिए आधुनिक उपकरण मौजूद हैं जिससे अपराध की जांच में तेजी आती है। इन वाहनों से जांच टीम को अपराध स्थल पर ही प्राथमिक विश्लेषण करने में मदद मिलती है जिससे सटीक परिणाम प्राप्त होते हैं। साथ ही विशेषज्ञों की टीम अपराध स्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीकों से सबूत जुटाती है। इन वाहनों में सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं जो अपराध स्थल की निगरानी करने में मदद करते हैं।

वर्तमान में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में क्षेत्रीय विधि-विज्ञान प्रयोगशाला है। नए 34 फॉरेंसिक चलंत वाहनों को बिहार के सभी जिलों में भेजा जाएगा ताकि 7 साल से अधिक सजा वाले मामलों में त्वरित रूप से फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) जांच संभव हो सके। इसके अलावे साइबर फॉरेंसिक लैब भी पटना और राजगीर में स्थापित की जा रही है जिससे साइबर अपराध की जांच में सुधार होगा। क्राइम मामलों के जानकारों का कहना है कि देश में भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद ऐसे अपराध जिनमें सात वर्ष या अधिक की सजा का प्रावधान है उनमें घटनास्थल पर एफएसएल टीम या वैन की जांच अनिवार्य है। इस नए कानून के लागू होने से एफएसएल की जांच की प्रासंगिकता काफी बढ़ गई है।
आनेवाले समय में अपराध की जांच (Bihar crime control) में फॉरेंसिक चलंत वाहन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इन वाहनों के उपयोग से अपराधियों को सजा दिलाने में मदद मिलेगी और अपराध की दर में काफी गिरावट आएगी। बढ़ते टेक्नोलॉजी के दौर में पुलिस आधुनिकीकरण के साथ ही वैज्ञानिक तरीके से वारदात की जांच भी क्राइम कंट्रोल में काफी मददगार साबित होगी। इससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन का राज भी कायम रहेगा।
