Bihar rural roads : ग्रामीण कार्य विभाग राज्य में उच्च गुणवत्ता वाली बारहमासी ग्रामीण सड़कों के निर्माण के साथ-साथ उनके उचित रखरखाव को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पंचवर्षीय अनुरक्षण अवधि के अंतर्गत आने वाली ग्रामीण सड़कों एवं पुल-पुलियों की स्थिति की रियल-टाइम निगरानी के लिए विभाग द्वारा “बिहार रूरल रोड रूटीन मेंटेनेंस सिस्टम’ (बीआरआरएमएस)” मोबाइल ऐप को विकसित किया गया है। यह ऐप सड़कों की गुणवत्ता और ठेकेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सहायक सिद्ध हो रहा है।
Bihar rural roads : ग्रामीण सड़कों की अब रियल-टाइम निगरानी
इस नई तकनीकी व्यवस्था के तहत पंचवर्षीय अनुरक्षण के अधीन आने वाली राज्य योजना की सड़कों का निरीक्षण सुनियोजित, रैंडम और वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। ऐप के माध्यम से दो किलोमीटर तक की लंबाई वाली सड़कों में हर दो सौ मीटर पर तथा दो किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों में हर पांच सौ मीटर पर निरीक्षण बिंदु निर्धारित किए जाते हैं। संबंधित अधिकारी को उन निर्धारित बिंदुओं पर जाकर सड़क की स्थिति का सटीक आकलन करना होता है और जियो-टैग तस्वीरें ऐप पर अपलोड करनी होती हैं।

सड़कों की गुणवत्ता को जांचने के लिए इस ऐप में कुल चौबीस विस्तृत मापदंड निर्धारित किए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से गड्ढे, दरारें, किनारे की टूट-फूट, सतह की गुणवत्ता इत्यादि शामिल हैं। इन मापदंडों की कसौटी पर परखने के बाद सड़क को संतोषजनक (एस), संतोषजनक लेकिन सुधार की आवश्यकता (एसआरआई) और असंतोषजनक (यू), इन तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए विभाग ने हर स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। इसके तहत कनीय अभियंता को अपने क्षेत्राधिकार की शत-प्रतिशत सड़कों का, सहायक अभियंता को पचास प्रतिशत सड़कों का और कार्यपालक अभियंता को दस प्रतिशत सड़कों का त्रैमासिक निरीक्षण करना अनिवार्य किया गया है।

इसके साथ ही संबंधित अधीक्षण अभियंता द्वारा भी न्यूनतम दो प्रतिशत योजनाओं का निरीक्षण किया जाता है। इन नियमित जांच के अतिरिक्त, मुख्यालय स्तर से नामित उड़नदस्ता दल (फ्लाइंग स्क्वाड) और वरीय पदाधिकारियों द्वारा भी लगातार औचक निरीक्षण किया जा रहा है। अब तक कुल 1,09,831 निरीक्षण किया जा चुका है। विभागीय मुख्यालय के फ्लाइंग स्क्वाड ने भी अपने लक्ष्य का 92 प्रतिशत निरीक्षण पूर्ण कर उल्लेखनीय कार्य किया है।
ग्रामीण कार्य विभाग ग्रामीण सड़कों के रखरखाव को लेकर गंभीर है। इस दिशा में कार्य में लापरवाही बरतने वाले संवेदकों पर जीरो टॉलरेंस की सख्त नीति अपनाई जा रही है। जिन सड़कों को निरीक्षण के दौरान असंतोषजनक (यू) या सुधार की आवश्यकता (एसआरआई) वाली श्रेणी में रखा गया है, उनके संवेदकों को तुरंत नोटिस जारी कर सुधार का निर्देश दिया जा रहा है, जिसे ठेकेदार को सड़क के सुधारात्मक कार्य निरीक्षण की तिथि से अधिकतम पंद्रह दिनों के भीतर और पुलों के कार्य इक्कीस दिनों के भीतर पूरे करने होते हैं।

सुधारात्मक कार्य संपन्न होने के बाद संबंधित अधिकारी द्वारा ऐप के माध्यम से पुनः सत्यापन किया जाता है। यदि सत्यापन में भी ग्रामीण सड़क या पुल असंतोषजनक पाया जाता है, तो कार्यपालक अभियंता द्वारा संवेदक पर बिहार ठेकेदार निबंधन नियमावली-2007 के कड़े प्रावधानों के तहत एकरारनामा रद्द करने, कालीसूची में डालने या डिबार करने जैसी दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीण कार्य विभाग की यह मुहिम सुनिश्चित कर रही है कि बिहार के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को सालों भर बारहमासी सड़क सम्पर्कता के माध्यम से सुगम यातायात की सुविधा निर्बाध रूप से मिलती रहे।
