Indian Stock Market Crash : गुरुवार सुबह घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक टैरिफ लागू किए जाने का असर सीधे तौर पर बाजार (Indian Stock Market Crash) में दिखा। बुधवार को गणेश चतुर्थी के कारण बंद रहने के बाद आज जैसे ही बाजार खुला, निवेशकों में घबराहट दिखी और बिकवाली तेज हो गई।
Indian Stock Market Crash
सुबह के सत्र में ही बीएसई सेंसेक्स करीब 700 अंक टूटकर 80,107 के स्तर (Indian Stock Market Crash) तक चला गया। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स भी लगभग 187 अंक गिरकर 24,514 के आसपास आ गया। शुरुआती कारोबार में ही करीब 1,458 कंपनियों के शेयर लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे, जबकि 1,023 स्टॉक्स हरे निशान में रहे।

किन शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव?
सुबह के कारोबार में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, इंफोसिस, जियो फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस जैसे हैवीवेट स्टॉक्स गिरावट के साथ ट्रेड करते दिखे। हालांकि, गिरावट के इस माहौल में हीरो मोटोकॉर्प, एशियन पेंट्स और टाइटन जैसे चुनिंदा स्टॉक्स में खरीदारी देखी गई।
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सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर
अमेरिका के नये टैरिफ का सबसे भारी असर (Trump Tariff Impact) उन सेक्टर्स पर पड़ा है, जो निर्यात पर निर्भर हैं। खासकर टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, कालीन (Carpet), फर्नीचर और झींगा (Shrimp) इंडस्ट्री से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1% तक की गिरावट रही।
इसके साथ ही निफ्टी बैंक और निफ्टी मेटल लगभग 0.9% टूटे। आईटी और रियल्टी सेक्टर में भी कमजोरी दर्ज की गई। बाजार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX 5% उछल गया, जो निवेशकों में अनिश्चितता और चिंता को दर्शाता है।

क्यों टूटा बाजार? (Key Reasons Behind Market Crash)
विशेषज्ञों की माने तो Trump Tariff Impact का खासा असर पड़ा है। अमेरिका ने भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगा दिया, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई। वहीं, विदेशी निवेशक (FIIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं। सिर्फ अगस्त में ही अब तक उन्होंने ₹34,700 करोड़ से ज्यादा की हिस्सेदारी बेच दी है। Stretched Valuations की बात करें तो कंपनियों के कमजोर नतीजों और ऊंचे वैल्यूएशन की वजह से बाजार दबाव में है।
समीक्षकों का मानना है कि भविष्य में कंपनियों की कमाई का ग्रोथ भी उम्मीद से कम रह सकता है। रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिका की नाराजगी और कड़े रुख ने भारत पर दबाव बढ़ाया है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में छोटे और मिडकैप शेयरों से निकलकर बड़े और सुरक्षित स्टॉक्स में निवेश करना बेहतर होगा। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) आक्रामक खरीदारी कर रहे हैं, जो बाजार को सहारा दे सकती है। गौरतलब है कि अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय शेयर बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
