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JIO standalone 5G : भारत में 5G की असली तस्वीर: स्टैंडअलोन नेटवर्क से जियो ने बनाई मजबूत बढ़त

JIO standalone 5G : भारत में 5G की प्रतिस्पर्धा अब केवल लॉन्च तक सीमित नहीं रही है। देश के प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर—रिलायंस जियो और भारती एयरटेल—ने 5G के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाईं। जियो ने शुरुआत से ही पूरी तरह स्टैंडअलोन (SA) 5G नेटवर्क पर निवेश किया, जबकि एयरटेल ने नॉन-स्टैंडअलोन (NSA) मॉडल के जरिए तेजी से सेवाएं शुरू कीं। अब यह फर्क उपयोगकर्ता अनुभव में साफ दिखने लगा है।

JIO standalone 5G : भारत में 5G की असली तस्वीर

ओपनसिग्नल के आंकड़ों के अनुसार, जियो के 5G उपभोक्ता अपने कुल मोबाइल समय का 67.3 प्रतिशत वास्तव में 5G नेटवर्क पर बिताते हैं, जबकि 5G सिग्नल की उपलब्धता 68.1 प्रतिशत है। यह बेहद कम अंतर दर्शाता है कि जियो का नेटवर्क कवरेज को प्रभावी उपयोग में बदल पा रहा है। इसके मुकाबले एयरटेल की 5G सिग्नल उपलब्धता 66.6 प्रतिशत होने के बावजूद उसके उपभोक्ता केवल 28 प्रतिशत समय ही 5G पर रहते हैं, जिसकी मुख्य वजह उसका 4G पर निर्भर NSA नेटवर्क है।

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JIO standalone 5G
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वोडाफोन आइडिया ने मार्च 2025 में मुंबई से 5G सेवाओं की शुरुआत की और नेटवर्क अभी शुरुआती चरण में होने के कारण 5G का वास्तविक उपयोग सीमित है। वहीं बीएसएनएल 5G से पहले स्वदेशी 4G नेटवर्क पर फोकस कर रहा है. लगभग 98,000 5G-रेडी टावर स्थापित कर चुका है और 2026 में लॉन्च प्रस्तावित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जियो की बढ़त उसके स्टैंडअलोन 5G आर्किटेक्चर की वजह से है। SA नेटवर्क में 5G को 4G पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे डेटा उपयोग के दौरान नेटवर्क स्विचिंग कम होती है। इसके अलावा जियो द्वारा 700 MHz स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल इमारतों के भीतर बेहतर कवरेज और स्थिर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करता है, जो रोजमर्रा के उपयोग में बड़ा अंतर पैदा करता है।

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JIO standalone 5G
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ओपनसिग्नल के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि जियो के 5G उपयोगकर्ताओं को 4G की तुलना में लगभग 11 गुना अधिक डाउनलोड स्पीड मिलती है। हालांकि, जियो की असली ताकत केवल तेज़ स्पीड नहीं, बल्कि वीडियो स्ट्रीमिंग, वीडियो कॉलिंग और वेब ब्राउज़िंग जैसे रोजमर्रा के कामों में मिलने वाली स्थिरता और भरोसेमंद अनुभव है।

JIO standalone 5G
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ग्राहकों और कमाई के मोर्चे पर भी जियो आगे है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 तक जियो के 5G ग्राहकों की संख्या 30 करोड़ के करीब पहुंच सकती है। वहीं फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (AirFiber) के जरिए अक्टूबर 2025 तक जियो के ग्राहकों की संख्या 1.02 करोड़ हो चुकी है, जो प्रतिद्वंद्वियों से कई गुना अधिक है।

JIO standalone 5G
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विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे सस्ते 5G स्मार्टफोन बढ़ेंगे और प्रति उपयोगकर्ता डेटा खपत 40 GB प्रति माह की ओर बढ़ेगी, नेटवर्क पर दबाव भी बढ़ेगा। फिलहाल, स्टैंडअलोन 5G नेटवर्क, व्यापक कवरेज और मजबूत उपयोगकर्ता अनुभव के दम पर रिलायंस जियो भारत में 5G की दिशा और तस्वीर दोनों बदलता नजर आ रहा है।

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