PATNA : बिहार की सियासी पिच पर अधिक संघर्ष न करके भी सत्ता का स्वाद चखने वाले मुकेश सहनी का अब लगता है गेमओवर हो गया। 3 साल पहले वीआईपी पार्टी की स्थापना कर बिहार सरकार में मंत्री बने मुकेश सहनी के संघर्ष के दिन अब शुरू होने वाले हैं क्योंकि उनकी ही पार्टी के तीन विधायकों ने ब’गावत कर बीजेपी की राह पकड़ ली। हालांकि सियासी पंडितों की माने तो मुकेश सहनी ने अपने इस छोटे से सियासी करियर में तीन बड़ी गलतियां कर बीजेपी से दुटश्मनी मोल ले ली।
मुकेश सहनी की गलती नंबर – 1
बिहार के पशुपालन मंत्री मुकेश सहनी ने बीजेपी का सहारा लेते हुए बिहार विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की लेकिन उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान उन्होंने बीजेपी के खिलाफ ही अपने 53 प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया। यही नहीं, चुनाव के दौरान मुकेश सहनी ने अख़बारों में बीजेपी के खिलाफ फुल पेज का विज्ञापन भी दिया और वोटर्स से बीजेपी को हराने की अपील की थी।
हालांकि इस चुनाव में वीआईपी को एक भी सीट नसीब नहीं हुई और कई सीटों पर उनकी जमानत भी जब्त हो गई। इसी गलती के बाद से बीजेपी की भौंहें तन गई और भाजपा ने ‘ऑपरेशन मुकेश सहनी’ स्टार्ट कर दिया।
मुकेश सहनी की गलती नंबर – 2
यूपी इलेक्शन में की गई गलती से सबक नहीं लेते हुए मुकेश सहनी ने एक और बड़ी गलती कर दी। बिहार में 24 सीटों पर होने वाले MLC चुनाव में बीजेपी के खिलाफ 7 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए, जिसके बाद बीजेपी सिरे से उखड़ गई। सहनी की इस हरकत से बीजेपी काफी नाराज हुई।
मुकेश सहनी की गलती नंबर – 3
यही नहीं इन दो गलतियों के बाद मुकेश सहनी ने बोचहां विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी से पं’गा ले लिया। दरअसल, इस सीट पर साल 2020 विधानसभा चुनाव में वीआईपी के मुसाफिर पासवान ने जीत दर्ज की थी। मगर पिछले दिनों हुई उनकी मौ’त के बाद इस सीट पर चुनाव हो रहा है। इस इलेक्शन में बीजेपी ने बेबी कुमारी को टिकट देकर मैदान में उतार दिया है। वहीं, बाद में मुकेश सहनी ने इस सीट पर अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा की तो बीजेपी के सब्र का बांध टूट गया।
बीजेपी के खिलाफ लगातार अपने उम्मीदवार उतारने के बाद लगभग ये तय हो गया कि अब एनडीए में उनके दिन लदने वाले हैं लिहाजा बुधवार को जैसी ही वीआईपी प्रत्याशी गीता कुमारी ने पर्चा दाखिल किया, वैसे ही बीजेपी ने मुकेश सहनी का गेमओवर कर दिया।
