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Bihar Politics : नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासत तेज, बीजेपी को लेकर उपेन्द्र कुशवाहा का बड़ा बयान

PATNA : बिहार में नगर निकाय चुनाव (municipal elections in Bihar) को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसके बाद से ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से लगातार सियासी तीर छोड़े जा रहे हैं। इस बीच जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा (Jdu Leader Upendra Kushwaha) ने बड़ा बयान दिया है।

उपेन्द्र कुशवाहा का बड़ा बयान

जेडीयू के वरिष्ठ नेता उपेन्द्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने कहा है कि ये नीतीश सरकार (Nitish Government) की सफलता है। अति पि’छड़ा वर्ग के लिए नगर निकाय चुनाव में आरक्षण की व्यवस्था मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने की है। अति पि’छड़ा वर्ग का आरक्षण खत्म करने की भाजपाई सा’जिश नाकाम हो गयी है। सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के रहते अति पि’छड़ा का हक़ कोई भी नहीं छीन सकता है।

गौरतलब है कि बिहार में दो चरणों में निकाय चुनाव कराने का फैसला लिया गया है। पहले चरण के लिए 18 दिसंबर को वोटिंग होगी और इसकी मतगणना 20 दिसंबर को होगी जबकि सेकेंड फेज के चुनाव के लिए 28 दिसंबर को मतदान होगा और 30 दिसंबर को मतों की गिनती होगी।

हाईकोर्ट ने लगायी थी रोक

बीते 4 अक्टूबर को पटना हाईकोर्ट (Patna Highcourt) ने बिहार में चल रहे नगर निकाय चुनाव (municipal elections in Bihar) पर रोक लगा दी थी। पटना हाईकोर्ट ने कहा था कि बिहार सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने पि’छड़ों के आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। हाईकोर्ट ने सबसे ज्यादा ना’राजगी राज्य निर्वाचन आयोग पर जतायी थी। हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को अपने संवैधानिक जिम्मेवारी का पालन करने में विफल बताया था।

पटना हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव में पि’छड़ों के आरक्षण को लेकर दायर याचिका पर 29 सितंबर को सुनवाई पूरी कर ली थी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने हाईकोर्ट को इस मामले में जल्द सुनवाई कर फैसला सुनाने को कहा था। 4 अक्टूबर 2022 को इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल और एस. कुमार की बेंच ने अपना फैसला सुनाया था।

हाईकोर्ट की बेंच ने कहा था कि स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया था, उसका बिहार में पालन नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव में अति पिटछड़ों के आऱक्षण पर तत्काल रोक लगाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से कहा था कि उसने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिटछड़ों के आरक्षण के लिए तय ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं की।

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