Ayush Badoni : टीम इंडिया में आयुष बदोनी की एंट्री हुई है लेकिन सोशल मीडिया पर एक सवाल फिलहाल कौंध रहा है कि ये सेलेक्शन मेरिट पर है या मेहरबानी पर? न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में वॉशिंगटन सुंदर चोटिल हो गये लिहाजा टीम को एक भरोसेमंद ऑलराउंडर चाहिए था, जो ऑफ स्पिन भी करा सके, ऐसे में सेलेक्शन होता है दिल्ली के आयुष बडोनी का।
Ayush Badoni : सेलेक्शन MERIT या FAVOR?
आयुष बदोनी के सेलेक्शन के बाद क्रिकेट समीक्षकों की भौंहें तन जाती है और उंगली उठने लगती है सीधे हेड कोच गौतम गंभीर पर। फैन्स पूछने लगे हैं कि क्या गंभीर की कोचिंग में खेलना अब प्लस पॉइंट है? क्या सेलेक्शन में पहचान का वजन….परफॉर्मेंस से ज़्यादा भारी हो गया है?
आयुष बदोनी के जरा आंकड़े देखिए – लिस्ट A में 22 पारियां, एवरेज 36, विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 में खेले तीन मैच और एवरेज मात्र 8 । इन तीन मैचों में बनाए सिर्फ 16 रन लिहाजा इस प्रदर्शन के आधार पर सवाल तो बनता है क्योंकि जब दूसरे खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में रन का पहाड़ खड़ा कर रहे हैं तो बदोनी को “बैकडोर एंट्री” कैसे मिल गई?

हालांकि, IPL 2025 में बदोनी का स्ट्राइक रेट 148 रहा। रणजी और दलीप ट्रॉफी में उन्होंने लगातार असर डाला। इंडिया A के लिए ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका A के खिलाफ उन्होंने जिम्मेदारी वाली पारियां खेलीं। मतलब खिलाड़ी में दम है लेकिन क्या यही सही वक्त था?

पूर्व टेस्ट क्रिकेटर इरफान पठान ने दो टूक अंदाज में बोला है कि अगर रियान पराग फिट होते तो वही वॉशिंगटन सुंदर का सही रिप्लेसमेंट होते। यानी सवाल सिर्फ फैन्स नहीं उठा रहे…क्रिकेट एक्सपर्ट्स भी सोच में हैं तो बहस बदोनी के टैलेंट पर नहीं है। बहस इस पर है कि क्या टीम इंडिया में मौके बराबरी से मिल रहे हैं? आप बताइए— ये सेलेक्शन सही है या सवालों के घेरे में?


