Begusarai NMCG : गंगा आज भी बेगूसराय से होकर बह रही हैं लेकिन शहर के भीतर की नालियों से बहता गंदा पानी उसकी पवित्रता पर रोज नया दाग छोड़ रहा है। इसी प्रदूषण को रोकने और अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के तहत बेगूसराय में 17 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और सीवर नेटवर्क परियोजना स्वीकृत की गई थी।
Begusarai NMCG : सीवर नेटवर्क परियोजना सालों से अधूरी
इस परियोजना को 05 मार्च 2018 को 230 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी मिली। इसके बाद संबंधित कंपनी को 31 दिसंबर 2019 को कार्यादेश पत्र (LoA) जारी किया गया। परियोजना की निर्धारित अवधि 24 माह तय की गई थी यानी इसे 30 दिसंबर 2021 तक पूर्ण हो जाना चाहिए था। हालांकि, तय समय सीमा समाप्त होने तक परियोजना केवल 46% ही पूरी हो सकी। अत्यंत चिंताजनक तथ्य यह है कि लगभग चार वर्ष बीत जाने के बाद भी यह परियोजना आज तक अधूरी है।

यह देरी केवल तकनीकी या ठेकेदारी समस्या नहीं बल्कि निगरानी, समन्वय और जवाबदेही की गंभीर कमी का संकेत है। राज्य की कार्यान्वयन एजेंसी बुडको (Bihar Urban Infrastructure Development Corporation) से अपेक्षा थी कि वह परियोजना की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करेगी लेकिन वर्तमान स्थिति से स्पष्ट है कि आवश्यक गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिसके कारण राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की यह महत्वपूर्ण परियोजना अनावश्यक रूप से विलंबित होती चली गई।
परियोजना के लंबित रहने का असर व्यापक है। इससे जनहित प्रभावित हो रहा है, शहरी जल-प्रबंधन कमजोर पड़ रहा है और गंगा में प्रदूषण का दबाव कम होने के बजाय बना रहता है। नालों का अपशिष्ट जल बिना उपचार के बहकर पर्यावरण के साथ-साथ स्थानीय स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, जिससे जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ता है।

इसके अलावा सीवर नेटवर्क अधूरा रहने से कई इलाकों में जलनिकासी की समस्या बनी रहती है और बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है। साथ ही देरी के कारण लागत वृद्धि (कॉस्ट एस्केलेशन) और सार्वजनिक धन के उपयोग पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। समयबद्धता न होने से परियोजना की उपयोगिता और उद्देश्य दोनों कमजोर पड़ रहे हैं।
बुडको द्वारा किए गए कार्यों एवं परियोजना की निगरानी की जवाबदेही तय की जाए और विलंब के कारणों की स्पष्ट समीक्षा करते हुए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो। साथ ही संबंधित एजेंसियों और कार्यदायी संस्था की भूमिका की नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था बनाई जाए ताकि आगे किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई की गुंजाइश न रहे।
परियोजना के लिए एक वास्तविक, सार्वजनिक और बाध्यकारी (टाइम-बाउंड) कार्ययोजना जारी की जाए, जिसमें प्रत्येक चरण की स्पष्ट समयसीमा निर्धारित हो। इसके अलावा परियोजना की मासिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। बेगूसराय को अधूरी योजनाओं की नहीं, समय पर पूरी हुई जिम्मेदारियों की जरूरत है क्योंकि गंगा को केवल नारे नहीं, ठोस परिणाम चाहिए।
